Ram Setu

प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नही होती।

पिछले कई बरसों से हिंदु (सनातन) धर्म की बदनामी के लिए वामपंथीयों ने जैसे प्रण ही लिया है। कई उदाहरण से यह बात सिध्द होती है। चाहे वो राम सेतू का विषय हो, चाहे रामायण, महाभारत की वास्तविकता का विषय हो, चाहे लाखो वर्षों से चलती आ रही अनेक परंपराओं की बात हो वामपंथी और विदेशी मिडियाने हर बार सनातन धर्म और धर्म की परंपराओं का मजाक उडाया है।
काॅंग्रेस के नेता और भूतपूर्व कानून और न्याय मंत्री कपिल सिबल ने कहा था कि ‘‘इस बात का कोई वैज्ञानिक सबुत नही है कि राम मंदीर मनुष्य द्वारा बनाई गई वास्तु है’’
सन 2007 में युपीए सरकार ने दाखिल किए गए 2 अॅफिडेव्हिट वापिस लिए जिसमें स्पष्ट लिखा था कि ‘‘भगवान श्री राम काल्पनिक है और इस बात का कोई वैज्ञानिक सबुत नही है कि राम सेतु मनुष्य द्वारा बनाई गयी वास्तु है’’
अगर कोई विदेशी ताकद सनातन संस्कृती और इतिहास को बदनाम और उसका अस्तित्व नष्ट करना चाहे तो हम समझ सकते है कि एैसे करने के पिछे उस ताकद का उद्देश यही होता है कि दुसरों को कमजोर करो और स्वयं उपर उठो लेकिन आश्चर्य तो तब होता है जब स्वयं सनातनी (हिंदू) ही अपनी संस्कृती और इतिहास को बदनाम करने कि कोशिश करता है।
महर्शि वाल्मिकी द्वारा लिखीत रामायण महाकाव्य में यह बात स्पष्ट रूप से बताई गई है कि जब भगवान श्रीराम माता सीता की खोज में दक्षिण भारत में भ्रमण कर रहें थे तब राम भक्त हनुमान को माता सीता के कुछ आभुषण मिले, वह आभुषणों की श्रृंखला उत्तर दिशा से लेकर दक्षिण दिशा कि ओर थी। तभी हनुमान औंर उनके सहयोगियोंने माता सिता की खोज दक्षिण दिषा में करना शुरू किया, खोज करते करते वानर सेना समुंदर तक आ पहुंची। उसके बाद हनुमानजी ने स्वयं लंका में जाकर माता सिता का पता लगाया। श्रीराम द्वारा भेजे गए शांती दुत का शांती प्रस्ताव ठुकरा कर रावण ने श्रीराम को युध्द के लिए ललकारा था। अपनी सेना को लंका तक पहुंचाने के लिए समंदर को पार करना आवश्यक था, इसी कारण श्रीराम ने समंदर से इस समस्या का समाधान पुछा तब समंदर ने सेतु बनाने का सुझाव दिया। इसी कारण श्रीराम ने अपनी वानर सेना की मदत से ‘राम सेतु’ बनाया।

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Sachin

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